भूमिका (Introduction)
Parshuram Jayanti हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और ब्राह्मणत्व के प्रतीक थे।
इस लेख में हम जानेंगे कि परशुराम कौन थे, उनका जीवन परिचय, और वह कारण क्या था जिसकी वजह से उन्होंने 21 बार क्षत्रियों का धरती से विनाश किया।
Parshuram Jayanti क्या है? (What is Parshuram Jayanti)
Parshuram Jayanti वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह तिथि अक्षय तृतीया के साथ आती है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
👉 Parshuram Jayanti पर विशेष रूप से:
- भगवान परशुराम की पूजा
- व्रत और दान
- शस्त्र और शास्त्र की पूजा
की जाती है।
भगवान परशुराम का जन्म और परिचय
- पिता: महर्षि जमदग्नि
- माता: रेणुका
- जन्म स्थान: माना जाता है – महेंद्र पर्वत
- अवतार: भगवान विष्णु का छठा अवतार
भगवान परशुराम बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी, तपस्वी और पराक्रमी थे। उन्हें भगवान शिव से परशु (फरसा) प्राप्त हुआ, जिसके कारण उनका नाम पड़ा – परशुराम।
परशुराम और क्षत्रियों के बीच संघर्ष
प्रश्न: परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का विनाश क्यों किया?
इस प्रश्न का उत्तर धर्म और अधर्म के संघर्ष में छिपा है।
मुख्य कारण:
- क्षत्रियों का अत्याचार
समय के साथ कई क्षत्रिय राजा अहंकारी, क्रूर और अधर्मी हो गए थे। वे ऋषि-मुनियों पर अत्याचार करने लगे। - राजा कार्तवीर्य अर्जुन द्वारा कामधेनु हरण
राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन ने महर्षि जमदग्नि की कामधेनु गाय को बलपूर्वक छीन लिया और बाद में उनके पिता की हत्या करवा दी। - धर्म की स्थापना हेतु प्रतिज्ञा
पिता की हत्या के बाद भगवान परशुराम ने प्रतिज्ञा ली कि वह 21 बार पृथ्वी को अधर्मी क्षत्रियों से मुक्त करेंगे।
👉 यही कारण बना कि भगवान परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का विनाश किया।
21 बार क्षत्रिय संहार का आध्यात्मिक अर्थ
यह केवल हिंसा नहीं थी, बल्कि:
- अधर्म का नाश
- धर्म की पुनः स्थापना
- सत्ता के अहंकार का अंत
भगवान परशुराम ने हर बार युद्ध के बाद पृथ्वी को ब्राह्मणों को दान कर दिया, जिससे स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि न्याय था।
परशुराम – एक चिरंजीवी अवतार
भगवान परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है। मान्यता है कि:
- वे आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं
- कलियुग में भी धर्म की रक्षा कर रहे हैं
- कल्कि अवतार के गुरु होंगे
Parshuram Jayanti का धार्मिक महत्व
Parshuram Jayanti पर:
- ब्राह्मण, क्षत्रिय और सर्व समाज द्वारा पूजा
- अस्त्र-शस्त्र पूजन
- सत्य और न्याय का स्मरण
किया जाता है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही समाज का संतुलन बना रह सकता है।
Parshuram Jayanti से मिलने वाली शिक्षा
- शक्ति का प्रयोग केवल धर्म के लिए
- अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना
- अहंकार का अंत निश्चित है
- ज्ञान और शौर्य का संतुलन आवश्यक है
FAQs – Parshuram Jayanti (SEO FAQ Schema Ready)
Parshuram Jayanti क्यों मनाई जाती है?
Parshuram Jayanti भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है।
परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का विनाश क्यों किया?
क्षत्रियों के अत्याचार, धर्म की रक्षा और पिता की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए।
क्या भगवान परशुराम आज भी जीवित हैं?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान परशुराम चिरंजीवी हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
Parshuram Jayanti केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और साहस का प्रतीक है। भगवान परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि जब अधर्म अपनी सीमा पार कर जाए, तब धर्म की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाना आवश्यक हो जाता है।
Parshuram Jayanti हमें सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।




